बद्रीनाथ मंदिर के 21 अद्भुत तथ्य | 21 Amazing Facts About Badrinath Temple Uttarakhand in Hindi |

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 बद्रीनाथ मंदिर के अद्भुत तथ्य | Badrinath Temple Amazing Facts Uttarakhand in Hindi|

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बद्रीनाथ मंदिर समुद्र तल से 3100 मीटर की ऊंचाई पर उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है। उत्तराखंड चार धाम यात्रा का अंतिम पड़ाव बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु बद्रीनाथ मंदिर दर्शन के लिए पहुँचते हैं। आज हम उत्तराखंड के इस पवित्र बद्रीनाथ के 21 अद्भुत और रहस्यमयी तथ्यों के बारे में जानेंगे।

 

बद्रीनाथ मंदिर के बारे में 21 अद्भुत तथ्य | 21 Facts about Badrinath Temple in Hindi |

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Fact 1 about Badrinath बद्रीनाथ भारत के चार धामों में एक है | Badrinath is also one of India’s Char Dham | (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

बद्रीनाथ मंदिर उत्तराखंड चार धामों में से एक है यह बात तो सभी जानते हैं। लेकिन शायद बहुत कम लोगों को पता होगा कि बद्रीनाथ मंदिर भारत के प्रसिद्ध चार धामों में भी एक है।

उत्तराखंड चार धामों के नाम यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ है।

भारत चार धामों के नाम बद्रीनाथ, द्वारिका, पुरी, रामेश्वरम हैं।

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Fact 2 about Badrinath बद्रीनाथ महाभारत काल से जुड़ा है | Badrinath is related to Mahabharat | (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

महाभारत के दौरान पांडवों ने यहां “बद्री” वृक्ष देखा था। बद्री वृक्ष का तना गोल, पत्ते चिकने और घनी छाया वाला था। इस वृक्ष के दैविक फलों में मानो शहद की धारा बहती थी। माना जाता है कि इस ही वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु ने ध्यान लगाया था।

Fact 3 about Badrinath बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है | Badrinath Temple is dedicated to Lord Vishnu | (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

अधिकतर लोगों को लगता है कि बद्रीनाथ में भगवान शिव को पूजा जाता है जो कि गलत है। बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। मंदिर के मुख्य गर्भग्रह में श्री विष्णु के साथ नर नारायण की ध्यानावस्था में मूर्ति है। शालिग्राम पत्थर से बनी मूर्ति एक मीटर ऊंची है।

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मूर्ति में भगवान ने कई रत्नों के साथ एक स्वर्ण मुकुट पहना हुआ है और उनके माथे पर हीरों से जड़ा हुआ तिलक है।

Fact 4 about Badrinath बद्रीनाथ मंदिर का प्रसाद (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

बद्रीनाथ मंदिर में भगवान नारायण को पवित्र प्रसाद के रूप में वन तुलसीमाला, कच्चे चने, गोला, मिश्री आदि का भोग लगाया जाता है।

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Fact 5 about Badrinath बद्रीनाथ के कपाट साल में मात्र 6 महीने ही खुले होते है (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

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बद्रीनाथ मंदिर के कपाट, उत्तराखंड चार धाम यात्रा के दौरान मात्र 6 महीने तक दर्शन के लिए खुलते हैं। लगभग मई माह में कपाट खुलने के बाद दीवाली के बाद मंदिर के कपाट बंद किये जाते है। सर्दियों के दौरान भारी बर्फवारी की वजह से मंदिर, दर्शन के लिए बंद रहता है।

Fact 6 about Badrinath बद्रीनाथ के संबंध में भगवान शिव-पार्वती और विष्णु की कथा (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

बद्रीनाथ मंदिर की स्थापना के संबंध में एक पौराणिक कथा प्रचलित है। एक बार भगवान शंकर माता पार्वती के साथ हिमालय की यात्रा कर रहे थे। तभी उन्होंने बद्रीनाथ मार्ग के बीच में एक छोटे बच्चे को रोते हुए देखा। माता पार्वती तरस खाकर रुक गईं और रोते हुए बच्चे को गोद में उठा लिया। वह बालक रोना बंद कर मुस्कुराने लगा और तब बालक भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप में प्रकट हुआ।

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उसके बाद भगवान विष्णु ने भगवान शिव और माता पार्वती से आग्रह किया “हे प्रभु, यह केदारखंड आपका पवित्र क्षेत्र है, कृपया मुझे भी इस पवित्र क्षेत्र में आश्रय दें।”

शिव-पार्वती की सहमति से यह क्षेत्र वैष्णववाद का सबसे बड़ा तीर्थ बन गया।

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Fact 7 about Badrinath मंदिर के स्वर्ण द्वार और सिंहासन  (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

बद्रीनाथ मंदिर के गर्भगृह के द्वार पहले चांदी के थे। लेकिन 12 अक्टूबर 2005 को मुंबई के हीरा व्यवसायी सेठ मोतीराम विशनदास लखी द्वारा मंदिर के द्वार को सोने का बनाया गया था। साथ ही लखी परिवार ने बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्रीनाथ को स्वर्ण सिंहासन और गर्भगृह (गर्भगृह), स्वर्ण द्वार की पेशकश की।

Fact 8 about Badrinath मंदिर के पुजारी (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

बद्रीनाथ के पुजारियों के बारे में एक दुर्लभ तथ्य यह है कि स्वामी शंकराचार्य की व्यवस्था के अनुसार बद्रीनाथ की पूजा दक्षिण भारत की “नंबूदरी जाति” के ब्राह्मणों द्वारा की जाती है, जिन्हें “रावल” कहा जाता है। रावल से पहले बद्रीनाथ में “दांडी संन्यासी महंत” पूजा करते थे।
साल 1776 में अंतिम दांडी महंत “रामकृष्ण स्वामी” की मृत्यु के बाद, उनका कोई उत्तराधिकारी नहीं था, जिसके बाद पूजा का अधिकार दांडी संन्यासियों से निकलकर “रावल” के हाथों में आ गया।
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Fact 9 about Badrinath बद्रीनाथ समिति के बारे में तथ्य (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

बद्रीनाथ मंदिर समिति का गठन फरवरी 1941 में किया गया था। इस समिति के अध्यक्ष को उस समय उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नामित किया गया था और सदस्यों को उत्तर प्रदेश विधान परिषद, विधानसभा, टिहरी के पूर्व महाराज और जिला पंचायत चमोली द्वारा नामित किया गया था। आज के समय में बद्रीनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष और सदस्यों को मनोनीत करने का कार्य उत्तराखंड सरकार करती है।

बद्रीनाथ मंदिर प्रबंधन का काम अब यूसीडीडीएमबी (उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड) द्वारा किया जाता है। देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को उत्तराखंड सरकार द्वारा ही बनाया गया है जो उत्तराखंड में लगभग 50 से अधिक मंदिरों के प्रबंधन का कार्य देखता है।
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Fact 10 about Badrinath दिव्य-ज्योत (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

हर साल भगवान बद्रीनाथ के कपाट बंद होने की स्थिति में मंदिर के अंदर हमेशा एक विशाल दीपक (दीया) जलाया जाता है। कपाट बंद करने पर यह दीया पूरी तरह से तेल से भर दिया जाता है। यह तब तक जलता रहता है जब तक कि कपाट खुल नहीं  जाते।

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Fact 11 about Badrinath बद्रीनाथ की संरचना (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

बद्रीनाथ मंदिर की संरचना तीन भागों में विभाजित है।

सिंह-द्वार, मंडप, गर्भगृह।
भगवान बद्रीनाथ के देवता मुख्य गर्भगृह में लगभग साढ़े तीन फीट की शालिग्राम चट्टान, चतुर्भुज, पद्मासन में तपस्या के रूप में विराजमान हैं।

बद्रीनाथ 108 दिव्य देसम में से एक है। दिव्य देसम उन 108 विष्णु मंदिरों में से एक है जिनका उल्लेख अलवर (संतों) के कार्यों में किया गया है।  “दिव्य” का अर्थ है “दिव्य” और “देसम” का अर्थ है “निवास स्थान” (मंदिर)।  बद्रीनाथ इन्हीं 108 दिव्य देसमों में से एक है।

सभी 108 दिव्य देशम में से 105 भारत में ही स्थित हैं, जबकि एक नेपाल में स्थित है, और अंतिम दो को सांसारिक क्षेत्र से बाहर माना जाता है।

Fact 12 about Badrinath पंच-बद्री मंदिरों में से एक है बद्रीनाथ  (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

उत्तराखंड में भगवान विष्णु के 5 प्रमुख मंदिर हैं जिन्हें पंच बद्री माना जाता है।

उत्तराखंड पंच बद्री: बद्रीनाथ, योगध्यान-बद्री, वृद्ध-बद्री, आदि-बद्री, भविष्य-बद्री हैं।
बद्रीनाथ इन 5 पंच-बद्री में सबसे बड़ा विष्णु मंदिर है। ये सभी पांचो मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित हैं।

Fact 13 about Badrinath ब्रिटिश शासन के दौरान बद्रीनाथ  (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

20वीं सदी में जब गढ़वाल को दो भागों में बांटा गया तो बद्रीनाथ मंदिर ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया था ।  हालांकि बद्रीनाथ मंदिर की प्रबंधन समिति टिहरी महाराज (राजा) के अधीन रहती है।

Fact 14 about Badrinath यह क्षेत्र आपदा संभावित क्षेत्र है  (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

बद्रीनाथ मंदिर की उम्र और हिमस्खलन से क्षतिग्रस्त होने के कारण कई प्रमुख जीर्णोद्धार हुए हैं।
17 वीं शताब्दी में, गढ़वाल के राजाओं द्वारा मंदिर का जीर्णोद्धार और विस्तार किया गया था।
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1803 के महान हिमालयी भूकंप में महत्वपूर्ण क्षति के बाद, इसे बड़े पैमाने पर जयपुर के राजा द्वारा पुनर्निर्मित किया गया था।

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Fact 15 about Badrinath भगवान राम की यात्रा (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

भगवान राम भी भगवान नारायण (भगवान विष्णु) की पूजा करने के लिए यहां बद्रीनाथ (बद्रिकाश्रम) पहुंचे थे ।

Fact 16 about Badrinath पांडवों की यात्रा (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

“महाभारत वन पर्व” के 134/19/21 में पांडवों के बद्रीनाथ (बदरीकाश्रम) की यात्रा का उल्लेख है।

Fact 17 about Badrinath तुलसीदास की यात्रा (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

सोलहवीं शताब्दी के अंत के दौरान गोस्वामी तुलसीदास भी  बद्रीकाश्रम (बद्रीनाथ) के रास्ते कैलाश-मानसरोवर की यात्रा पर गए थे।

Fact 18 about Badrinath बद्रीनाथ का तप्त कुंड (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

बद्रीनाथ जैसी ठंडी जगह पर गर्म तप्त कुंड होना काफी आश्चर्यजनक है। हालाँकि अन्य धामों में भी ऐसे गर्म तप्त कुंड हैं। इन तप्त कुंडों का धार्मिक महत्व के साथ साथ स्वास्थ्य लाभ भी है। ऐसे कुंड में गंधक की मात्रा काफी होती है जिससे चर्म रोग खत्म हो जाते हैं। कोरोना काल में एहतियातन तौर पर तप्त कुंड के स्रोत को बंद कर दिया गया था।  यह इतिहास में शायद पहली बार हुआ जब बद्रीनाथ तप्त कुंड सूखा नजर आया।

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Fact 19 about Badrinath हिन्दू पवित्र पुस्तकों में भी है बद्रीनाथ का उल्लेख (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

बद्रीनाथ मंदिर का उल्लेख विभिन्न हिंदू पवित्र पुस्तकों जैसे भागवत पुराण और स्कंदपुराण में मिलता है।

बद्रीनाथ मंदिर के आसपास का क्षेत्र जिसे हम बद्रीकाश्रम कहते हैं, का उल्लेख पद्म पुराण में एक पवित्र और आध्यात्मिक स्थल के रूप में किया गया है।

Fact 20 about Badrinath मार्कंडेय ऋषि रॉक (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

मार्कंडेय ऋषि की तपस्या और कर्मों का स्थान भी बद्रीकाश्रम (बद्रीनाथ) था। जिस शिला पर वे बैठते थे, वह आज भी मार्कण्डेय शिला के नाम से जानी जाती है।

Fact 21 about Badrinath वेद-व्यास गुफा (बद्रीनाथ के बारे में तथ्य)

बद्रीनाथ शहर में ही “वेद व्यास ऋषि” की गुफा स्थित है। यह गुफा 5000 साल से भी ज्यादा पुरानी है। यह गुफा माणा गांव से 200 मीटर ऊपर एक विशाल पत्थर के नीचे बनी है। वेद व्यास जी ने इस गुफा में लंबे समय तक निवास किया और भारत संहिता, महाभारत, श्रीमद्भागवत आदि अष्टदास पुराणों की रचना की। महर्षि वेदव्यास ने इस गुफा में 18 (अठारह) पुराणों की रचना भी की थी।
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